भिंड। भिंड जिले में फर्जी हथियार लाइसेंस का गंभीर मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हथियार लाइसेंस जारी किए गए, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इस मामले में देहात थाना पुलिस ने छह फर्जी हथियार लाइसेंस धारकों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है।
आर्म्स शाखा प्रभारी राहुल सिंह भदौरिया की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में अजीत सिंह, गौरव भदौरिया, हेमंत राजेंद्र देवरे, राहुल दौलत पाटिल, जावेद अनवर और मोहम्मद राशिद को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से दो आरोपी महाराष्ट्र के निवासी बताए जा रहे हैं। सभी पर फर्जी तरीके से हथियार लाइसेंस बनवाने और नियमों के उल्लंघन का आरोप है।
सत्यापन में चौंकाने वाला खुलासा
पुलिस द्वारा आरोपियों के पतों का सत्यापन किए जाने पर मामला और गंभीर हो गया। दर्ज पतों पर पहुंचने पर संबंधित व्यक्ति नहीं मिले और कई पते पूरी तरह फर्जी पाए गए। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह किसी संगठित गिरोह का काम हो सकता है, जिसमें पहचान और दस्तावेज जानबूझकर गलत दर्शाए गए।
कई संदेही हिरासत में, पूछताछ जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई संदेही लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे गए या नहीं और इसमें दलालों या विभागीय कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।
DIG-SP की निगरानी में विशेष टीमें
प्रकरण सामने आने के बाद DIG और SP के निर्देशन में अलग-अलग जांच टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, दस्तावेजों, हथियारों की खरीद-फरोख्त और रिकॉर्ड में संभावित गड़बड़ियों की गहन जांच कर रही हैं।
कलेक्टर ने बनाई तीन सदस्यीय समिति
कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए आर्म्स शाखा के रिकॉर्ड की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, नियमों के पालन और रिकॉर्ड में हुई किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की जांच करेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक यह मामला अभी और बड़ा हो सकता है और जांच में नए नाम सामने आने की संभावना है। यदि विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। फर्जी हथियार लाइसेंस का यह मामला जिले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
