लेखक: लोकेश भारतीय (असिस्टेंट प्रोफेसर),आर्थिक मामलों के जानकार
भारतीय दार्शनिक चार्वाक का प्रसिद्ध कथन— “जब तक जिएं, सुख से जिएं और कर्ज लेकर भी घी पिएं”— इस बार प्रस्तुत मध्य प्रदेश बजट पर सटीक बैठता प्रतीत होता है।₹4.38 लाख करोड़ के इस बजट को राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने पेश किया। बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह सरकार की प्राथमिकताओं, नीतिगत सोच और भविष्य की दिशा का प्रतिबिंब होता है।

आय का बड़ा हिस्सा कर्ज पर निर्भर
बजट का सबसे अहम और चिंताजनक पहलू यह है कि राज्य की कुल आय में 50.2% हिस्सा कर्ज का है।राज्य को आय मुख्यतः—राज्य GSTकेंद्र सरकार से करों में हिस्साअनुदानसे प्राप्त होती है।लेकिन इन सबके बावजूद खर्च और आय के अंतर को पाटने के लिए बड़े पैमाने पर उधारी का सहारा लिया जा रहा है। यह स्थिति एक ओर विकास के लिए संसाधन उपलब्ध कराती है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में वित्तीय दबाव भी बढ़ा सकती है।
सामाजिक योजनाओं पर फोकस
सरकार ने इस बजट में कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दी है। विशेष रूप से लाड़ली बहना योजना की राशि ₹1250 से बढ़ाकर ₹1500 कर दी गई है।यह कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस योजना पर होने वाला हजारों करोड़ का खर्च यह संकेत देता है कि महिला सशक्तिकरण राज्य की विकास नीति का केंद्र है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश
बजट में सड़क निर्माण, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश की घोषणा की गई है।नई सड़कों का निर्माण मेट्रो विस्तार इलेक्ट्रिक बसें नए आवास परियोजनाएंये सभी पहल राज्य की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मध्य प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए बजट में किसानों के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं—सोलर पंप प्राकृतिक खेती को बढ़ावा बीमा योजनाएं यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
बड़ा सवाल: क्या कर्ज आधारित विकास टिकाऊ है?
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है— क्या कर्ज के सहारे किया जा रहा यह विकास दीर्घकाल में टिकाऊ साबित होगा?यदि इन निवेशों से—रोजगार सृजन बढ़ता है उद्योगों का विस्तार होता है राज्य की आय में वृद्धि होती हैतो यह कर्ज भविष्य में एक मजबूत पूंजी निवेश साबित हो सकता है।लेकिन यदि योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं देतीं, तो यही उधारी राज्य के लिए वित्तीय बोझ बन सकती है।
जनता के नजरिए से बजट
आम नागरिक के दृष्टिकोण से देखें तो—महिलाओं को अधिक आर्थिक सहायता किसानों को नई सुविधाएं शहरों में बेहतर बुनियादी ढांचा जैसे लाभ दिखाई देंगे।लेकिन इसके साथ राज्य की वित्तीय सेहत पर सतत निगरानी भी जरूरी होगी।
