रायसेन/राजा भोज ने औबेदुल्लागंज से 16 किलोमीटर की दूरी पर 11वीं सदी में भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया था, लेकिन कहा जाता है कि यह अधूरा ही रह गया, जोकि अब पूरा करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए बाकायदा कार्ययोजना तैयार की जा रही है। साथ ही मंदिर के जीर्णोद्धार में लगने वाली राशि का आकलन किया जा रहा है।
मंडीदीप में चल रही कंपनियों के सीएसआर फंड के सीएसआर फंड के जरिए ऐतिहासिक भोजपुर शिव मंदिर का कायाकल्प किया जाएगा। सभी जानते है कि मंदिर के निर्माण के वक्त आसपास की चट्टानों पर मंदिर का नक्शा उकेरा गया था, उसी के आधार पर मंदिर को नया स्वरुप दिया जाएगा। इसी के साथ ऐतिहासिक तथ्य है कि मंदिर के आसपास अन्य मंदिर भी थे, जिन्हें मुगलकाल में तोड़ दिया गया था, उन्हें भी पुनर्जीवित करने का काम किया जाएगा।

भोजपुर के मंदिर को इतिहासकारों ने उत्तर के सोमनाथ की संज्ञा दी है, जिसके लिए कहा जाता है कि इसके आसपास मंडप, महामंडप और अन्य संरचनाओं को बनाने की तैयारी है, जोकि पूरी तरह से ऐतिहासिक नक्शे पर आधारित होंगे। देश का सबसे बड़ा शिव मंदिर बनाने का भोज का सपना पूरा किया जाएगा। मंदिर के पश्चिमी भाग में एक पार्वती गुफा भी है, जिसमें भी कई ऐतिहासिक मूर्तियां रखी हुई है, उनको भी नया स्वरुप दिया जाएगा।
11वीं सदी में राजा भोज ने कराया था निर्माण राजा भोज ने भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण एक बड़ी सी चट्टान पर 1010 ईसवी से 1055 ईसवी के बीच शुरु कराया था। इस मंदिर में देश का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित है। इस संपूर्ण शिवलिंग की लंबाई 5.5 मीटर यानी 18 फीट है। मंदिर के अर्धनिर्माण के पीछे मान्यता है कि इसका निर्माण रात्रि में शुरु कराया गया था, जिसे सुबह रोक दिया गया था, इसीलिये गुंबद इसी तरह अधूरा है।
