बजट 2026–27 :युवा शक्ति, विकास और संकल्प का “बजट”?
अर्थिक मामलों के जानकार लोकेश भारतीय ने बजट 2026–27 पर अपनी राय बताते हुए कहा, सुकरात का एक मशहूर कथन है “मैं केवल इतना जनता हूँ, कि मैं कुछ नहीं जनता” जितने भी लोग नए बजट को देख अंदाज़ा लगा रहे है उनके लिए यह कथन बहुत कुछ कहता है। मेरे शब्दों में दावों से नहीं, उसकी वास्तविक दिशा से पहचाना जाता है बजट। और केंद्रीय बजट 2026–27 यही संदेश देता है कि भारत अब सिर्फ़ सपने नहीं देख रहा, बल्कि उन्हें साकार करने की तैयारी में है। यह बजट “युवा शक्ति आधारित विकास” के मंत्र के साथ पेश किया गया है, जिसमें सरकार ने साफ़ किया है कि उसका संकल्प गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाना है। यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह पहला बजट है जो कर्तव्य भवन में तैयार किया गया और जिसे तीन बड़े कर्तव्यों की भावना से प्रेरित बताया गया है। तीन कर्तव्य, पहला लक्ष्य- “विकसित भारत” सरकार के अनुसार पहला कर्तव्य है जिसमे हम आर्थिक विकास को तेज़ और स्थायी बनाने का प्रयास करेंगे। दूसरा- जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना। तीसरा कर्तव्य- “सबका साथ, सबका विकास” के विज़न के अनुरूप समावेशी विकास सुनिश्चित करना। हर बजट में आम जनता चाहती है की सरकार उनके लिए क्या कर रही है तो आपको बता दे कि, बजट की सबसे अहम घोषणाओं में से एक है ‘नया आयकर अधिनियम, 2025’, जो अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसका उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और समझने में आसान बनाना है। जिसका सीधा लाभ देश की आम जनता को मिलेगा। सरकार ने संकेत दिया है कि आयकर के नियम और फ़ॉर्म भी जल्द ही सरल रूप में अधिसूचित किए जाएंगे, जिससे आम करदाताओं की परेशानियाँ कम हो जाए।

एक और बड़ा बदलाव है टैक्स से जुड़े मामलों में कार्रवाइयों की संख्या में कमी। सरकार दंड और अभियोजन की प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाने जा रही है, ताकि अनावश्यक मुकदमों और भय के माहौल से करदाताओं को राहत मिल सके। और करदाता बिना किसी परेशानी के अपना कर सरकार को अदा कर सके। बजट में सहकारी क्षेत्र को मज़बूत करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। पहले से उपलब्ध कर कटौती का लाभ अब कैटल फीड और कॉटन सीड से जुड़ी प्राथमिक सहकारी समितियों को भी दिया जाएगा। इसका मतलब किसानो को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह कदम किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने में सहायक होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि युवा शक्ति ही भारत की असली पूंजी है। इस बजट का केंद्रीय विचार स्पष्ट है भारत का भविष्य उसकी युवा आबादी में है। शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता पर ज़ोर देकर सरकार युवाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास का भागीदार बनाना चाहती है। लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या यह बजट ज़मीन पर बदलाव लाएगा? क्या सरल टैक्स व्यवस्था वास्तव में आम आदमी को राहत देगी? और क्या युवा शक्ति भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी?
अगर साफ़ शब्दों में कहाँ जाए तो बजट 2026–27 ने दिशा तय कर दी है। अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की है और क्रियान्वयन के बाद उसके मोनेटरिंग की। अगर योजनाएँ सही ढंग से ज़मीन तक पहुँचीं, तो यह बजट आने वाले वर्षों में भारत की विकास गाथा का एक अहम अध्याय साबित हो सकता है।
