मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया है। संघ ने प्रमुख सचिव राजस्व विभाग को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां बताईं।
भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख एवं पंजीयन योजना 2026 को लेकर राजस्व अधिकारियों के संगठन ने अपना विरोध दर्ज कराया है। मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ की ओर से प्रदेश के अधिकांश जिलों में जिला कलेक्टरों के माध्यम से राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। संघ ने इस ज्ञापन में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत सौंपे गए कार्यों से विरत रहने की बात कही है।
संघ की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह निर्णय प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र सिंह चौहान के निर्देश पर लिया गया है। संघ का कहना है कि योजना के तहत तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को उप पंजीयक की शक्तियां प्रदान कर दस्तावेजों के निष्पादन का कार्य सौंपा गया है। इसी व्यवस्था को लेकर राजस्व अधिकारियों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को उप पंजीयक की शक्तियां देने पर आपत्ति
ज्ञापन में राजस्व अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों को उप पंजीयक की शक्तियां प्रदान कर दस्तावेजों के निष्पादन का कार्य सौंपा गया है।
संघ के अनुसार तहसीलदार और नायब तहसीलदार द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी होते हैं। वहीं उप पंजीयक का कार्य तृतीय श्रेणी और गैर राजपत्रित पद को सौंपा जाना संघ के अनुसार पदानुक्रम और पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
राजस्व अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से संवर्ग के पद और उसकी प्रशासनिक भूमिका को लेकर असंगति की स्थिति बन रही है। इसी कारण संघ ने योजना के अंतर्गत दिए गए अतिरिक्त दायित्वों पर अपना विरोध दर्ज कराया है।
पंजीयन कार्य को बताया गया विशेष विशेषज्ञता और संसाधन वाला काम
ज्ञापन में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा पंजीयन कार्य की प्रकृति को लेकर उठाया गया है। संघ ने कहा है कि तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के पास पहले से ही विभागीय कार्यों का अधिक दायित्व है।
इसके अलावा पंजीयन का कार्य विशेष विशेषज्ञता वाला कार्य होने के साथ-साथ अलग प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता वाला काम भी है। संघ के अनुसार पंजीयन से संबंधित कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अलग व्यवस्था और आवश्यक संसाधनों की जरूरत होती है।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि पंजीयन कार्य अर्धन्यायिक प्रकृति का है।
ऐसे में पहले से ही विभागीय कार्यों का अतिरिक्त भार संभाल रहे तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को इस तरह की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर संघ ने सवाल उठाया है।संघ ने योजना के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कार्यों से विरत रहने की बात कहीमध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि संघ के अधिकारी स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कार्यों से विरत रहते हुए अपने विभागीय कार्यों को निष्ठापूर्वक जारी रखेंगे।
यानी संघ का रुख यह है कि अधिकारी अपने नियमित राजस्व विभागीय कार्य करते रहेंगे, लेकिन स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कार्यों में भाग नहीं लेने की बात कही गई है।ज्ञापन को संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदित बताया गया है। इस पत्र पर संघ के पदाधिकारियों के हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
प्रदेश के अधिकांश जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से सौंपा गया ज्ञापनसंघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र सिंह चौहान के निर्देश पर प्रदेश के अधिकांश जिलों में जिला कलेक्टरों के माध्यम से राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया है।
ज्ञापन में संघ ने योजना के तहत तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को दिए जा रहे दायित्वों को लेकर अपनी आपत्तियां विस्तार से सामने रखी हैं। इसके साथ ही संघ ने इस व्यवस्था से विरत रहने की सूचना भी दी है।पत्र में आगे जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर के जिला अध्यक्षों को भी निर्देश दिए जाने का उल्लेख है।
इसमें मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में तुरंत कैविएट दायर करने की बात कही गई है।अब शासन के रुख पर रहेगी नजरस्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को लेकर राजस्व अधिकारियों के इस निर्णय के बाद अब शासन की ओर से लिए जाने वाले निर्णय पर नजर रहेगी।
फिलहाल संघ ने अपने ज्ञापन के माध्यम से अपनी आपत्तियां और मांग से जुड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। संघ का कहना है कि तहसीलदार और नायब तहसीलदारों पर पहले से विभागीय कार्यों का अधिक दायित्व है और पंजीयन कार्य अलग विशेषज्ञता एवं संसाधनों की आवश्यकता वाला कार्य है।ऐसे में स्वामित्व अधिकार अभिलेख एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत दिए गए नए दायित्वों को लेकर राजस्व अधिकारियों और शासन के बीच आगे क्या स्थिति बनती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।
